Ghalib Shayari – 120+ Best Mirza Ghalib Shayari in Hindi

Ghalib Shayari – अगर आप mirza ghalib shayari प्रेमी हैं और हिंदी में बेहतरीन ghalib shayari की तलाश में हैं तो इस लेख में आप अपने सभी शायरी प्रेमी दोस्तों को पढ़ और साझा कर सकते हैं। अपने पिछले लेख में हमने shayari on life और urdu shayari पर साझा किया है।

ghalib shayari
Ghalib Shayari

100+ Best Mirza Ghalib Shayari in Hindi and Urdu

आशिकी सब्र तलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक।


बाज़ीचा-ए-अत्फाल है दुनिया मेरे आगे,
होता है शब-ओ-रोज तमाशा मेरे आगे।


लो हम मरीज़-ए-इश्क़ के बीमार-दार हैं,
अच्छा अगर न हो तो मसीहा का क्या इलाज?


चांदनी रात के खामोश सितारों की क़सम,
दिल में अब तेरे सिवा कोई भी आबाद नहीं।


बस की दुश्वार है हर काम का आसान होना,
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसान होना।

Ghalib Shayari in Hindi

Ghalib Shayari in Hindi
Ghalib Shayari in Hindi

घर में था क्या कि तेरा ग़म उसे ग़ारत करता,
वो जो रखते थे हम इक हसरत-ए-तामीर सो है।


कहते तो हो यूँ कहते, यूँ कहते जो यार आता,
सब कहने की बात है कुछ भी नहीं कहा जाता।


पीने दे शराब मस्जिद में बैठ कर,
या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।


कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीर-ए-नीम-कश को,
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता।


जी ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात दिन,
बैठे रहे तसव्वुर-ए-जहान किये हुए।

mirza ghalib shayari in hindi
mirza ghalib shayari in hindi

आईना देख के अपना सा मुँह लेके रह गए,
साहब को दिल न देने पे कितना गुरूर था।


ज़िक्र उस परी-वश का और फिर बयाँ अपना,
बन गया रक़ीब आख़िर था जो राज़-दाँ अपना।


की हमसे वफ़ा तो गैर उसको जफा कहते हैं,
होती आई है की अच्छी को बुरी कहते हैं।
बना कर फकीरों का हम भेष ग़ालिब,
तमाशा एहल-ए-करम देखते हैं।


बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहज़ा निगाह,
जी में कहते हैं कि मुफ़्त आए तो माल अच्छा है।


तेरी वफ़ा से क्या हो तलाफी की दहर में,
तेरे सिवा भी हम पे बहुत से सितम हुए।

Shayari by Ghalib

shayari by ghalib
shayari by ghalib

ईमान मुझे रोके है जो खीचे है मुझे कुफ्र,
काबा मेरे पीछे है कायसा मेरे आगे।


उग रहा है दर-ओ-दीवार से सबज़ा ग़ालिब,
हम बयाबां में हैं और घर में बहार आई है।


आया है बे-कसी-ए-इश्क पे रोना ग़ालिब,
किसके घर जायेगा सैलाब-ए-बला मेरे बाद।


रोने से और इश्क में बे-बाक हो गए,
धोये गए हम इतने कि बस पाक हो गए।


मुँद गईं खोलते ही खोलते आँखें ग़ालिब,
यार लाए मेरी बालीं पे उसे पर किस वक़्त?

Mirza Ghalib Shayari Hindi

mirza ghalib shayari hindi
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आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद,
मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग।


तुम न आओगे तो मरने कि है सौ ताबीरें,
मौत कुछ तुम तो नहीं है कि बुला भी न सकूं।


ज़िंदगी अपनी जब इस शक्ल से गुज़री,
हम भी क्या याद करेंगे कि ख़ुदा रखते थे।


इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया,
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।


कासिद के आते आते ख़त एक और लिख रखूँ,
मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में।

Shayari of Ghalib

shayari of ghalib
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब,
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।


ये न थी हमारी किस्मत के विसाल-ए-यार होता,
अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता।


सिसकियाँ लेता है वजूद मेरा गालिब,
नोंच नोंच कर खा गई तेरी याद मुझे।


बे-खुदी बे-सबब नहीं ग़ालिब,
कुछ तो है जिस की परदा-दारी है।


इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना,
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।

Shayari of Ghalib on Ishq

shayari of ghalib on ishq
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उनके देखने से जो आ जाती है चेहरे पर रौनक,
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है।


तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई
मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई


कोई उम्मीद बर नहीं आती
कोई सूरत नजर नहीं आती
मौत का एक दिन मुअय्यन है
नींद क्यूं रात भर नहीं आती
आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हंसी
अब किसी बात पर नहीं आती।


उन के देखे से जो आ जाती है चेहरे पर रौनक
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है


तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना,
कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता

shayari on life by ghalib
shayari on life by ghalib

न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता,
डुबोया मुझको होने ने न मैं होता तो क्या होता !


इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं


इश्क मुझ को नहीं वहशत ही सही
मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही


हुआ जब गम से यूँ बेहिश तो गम क्या सर के कटने का,
ना होता गर जुदा तन से तो जहानु पर धरा होता!


आईना क्यूं न दूं कि तमाशा कहें जिसे
ऐसा कहां से लाऊं कि तुझ सा कहें जिसे

ghalib shayari in hindi font

हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया पर याद आता है,
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता !


कुछ तो पढ़िए कि लोग कहते हैं
आज गालिब गजल-सरा न हुआ


हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है


उस अंजुमन-ए-नाज की क्या बात है गालिब
हम भी गए वां और तेरी तकदीर को रो आए


न शोले में ये करिश्मा न बर्क़ में ये अदा
कोई बताओ कि वो शोखे-तुंदख़ू क्या है

ghalib shayari on love

आ ही जाता वो राह पर गालिब
कोई दिन और भी जिए होते


ये रश्क है कि वो होता है हमसुख़न हमसे
वरना ख़ौफ़-ए-बदामोज़ी-ए-अदू क्या है


चिपक रहा है बदन पर लहू से पैराहन
हमारी ज़ेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है


रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है


जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है

inspirational shayari by ghalib